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मुद्रा क्या होती है और यह कितने प्रकार की होती है

मुद्रा क्या होती है और यह कितने प्रकार की होती है

क्राऊदर के अनुसार, मुद्रा आधुनिक समय में मनुष्य द्वारा किये गए तीन महत्वपूर्ण अविष्कारों : मुद्रा , पहिया और वोट में से एक है | वर्तमान समय में वास्तविकता यह है कि बिना मुद्रा के किसी भी अर्थव्यवस्था की कल्पना भी नही की जा सकती है |

 

बूंद – बूंद पानी को तरसते लोग

बूंद – बूंद पानी को तरसते लोग

गर्मी में बूंद – बूंद पानी को तरसते लोग, गंदा पानी पीने को है मजबूर देशभर में अब अचानक गर्मी बढ़ने लगी है। इस गर्मी में ज़रा सी देर में ही हमारा गला सूखने लग जाता है और हम तुरंत पानी पीकर अपनी प्यास बुझाते हैं। मगर एक जगह ऐसी भी है जहां लोग अपनी प्यास बुझाने के लिए बूंद – बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं और वो जीवन बचाने के लिए गंदा पानी पीने के लिए मजबूर हैं। हम बात कर रहे हैं गिरिडीह की जहां जिस डाढ़ी में मवेशी पानी पीते हैं वही पानी ग्रामीण भी पीने को मजबूर हैं।

छात्र जीवन में अनुशासन का महत्व

छात्र जीवन में अनुशासन का महत्व
प्रिय छात्र आज हम बात करने जा रहे हैं कि प्रत्येक व्यक्ति और छात्र के जीवन में अनुशासन का क्या महत्व है और अनुशासन क्या है अधिक से अधिक शिक्षा प्राप्त कर लेने के पश्चात् भी हम यह नहीं कह सकते कि हम अनुशासन से परिपूर्ण हैं अर्थात् शिक्षा हमें केवल अनुशासन के लिए प्रेरित कर सकती है। और अनुशासन जितना शिक्षित व्यक्ति के लिए जरूरी है उतना ही अशिक्षित व्यक्ति के लिए भी अर्थात् प्रत्येक मनुष्य जीवन के लिए अनुशासित होना अत्यंत जरूरी है:-

घातक है-रेडियोधर्मी प्रदूषण ?

घातक है-रेडियोधर्मी प्रदूषण ?

ज विकास की गति के लिहाज से उर्जा की मॉग लगातार बढ़ती जा रही है।उर्जा के तमाम स्त्रोतों जैसे जल,कोयला,तेल और सौर उर्जा या तो सिकुड़ते जा रहे या फिर पर्यावरणीय दृष्टि से घातक है। ऐसी स्थिति में उर्जा की आपूर्ति की सततता के लिए परमाणु उर्जा की ओर सबकी नजरें है। परमाणु उर्जा का उत्पादन रेडियोधर्मी पदार्थों से होता है। रेडियोधर्मी तत्व उर्जा के असीमित स्त्रोत होते हैं तथा इनसे प्रचुर मात्रा में उर्जा प्राप्त की जा सकती है। परमाणु उर्जा का प्रमुख स्त्रोत यूरेनियम है और इसके आइसोटोप यूरेनियम-235 की एक टन मात्रा से उतनी ही उर्जा पैदा की जा सकती है, जितनी कि 30 टन कोयले से अथवा 1 करो

पृथ्वी पर पानी की कहानी

पृथ्वी पर पानी की कहानी

हमारी आकाशगंगा में कई ख़त्म हो रहे तारे होते हैं जो क्षुद्र ग्रह के अवशेष होते हैं.

ठोस पत्थर के गोले के तौर पर ये किसी तारे पर गिर कर ख़त्म हो जाते हैं.

तारों के वायुमंडल पर नज़र रखने वाले वैज्ञानिकों के मुताबिक क्षुद्र ग्रह पत्थर के बने होते हैं, लेकिन इनमें काफ़ी पानी भी मौजदू होता है.

इस नतीजे के आधार पर इस सवाल का उत्तर मिल सकता है कि पृथ्वी पर पानी कहां से आया?

'शुद्र ग्रहों में ख़ासा पानी'

मन के हारे हार है, मन के जीते जीत

“जो भी परिस्थितियाँ मिलें, काँटे चुभें कलियाँ खिले,

हारे नहीं इंसान, है संदेश जीवन का यही ।”

मनुष्य का जीवन चक्र अनेक प्रकार की विविधताओं से भरा होता है जिसमें सुख- दु:खु, आशा-निराशा तथा जय-पराजय के अनेक रंग समाहित होते हैं । वास्तविक रूप में मनुष्य की हार और जीत उसके मनोयोग पर आधारित होती है । मन के योग से उसकी विजय अवश्यंभावी है परंतु मन के हारने पर निश्चय ही उसे पराजय का मुँह देखना पड़ता है ।

अनुबन्ध का अर्थ एवं परिभाषा

अनुबन्ध का अर्थ एवं परिभाषा

अनुबन्ध (Contract) शब्द की उत्पति लेटिन शब्द कॉन्ट्रैक्टम (Contracturm) से हुई है, जिसका अर्थ है 'आपस में मिलाना' । सामान्य शब्दों में अनुबन्ध से आशय दो या अधिक व्यक्तियों को किसी कार्य को करने अथवा न करने हेतु आपस में मिलाने वाले समझौते अथवा ठहराव से है। वैधानिक दृष्टिकोण से अनुबन्ध का अर्थ विभिन्न विद्वानों द्वारा दी गयी परिभाषाओं के आधार पर स्पष्ट किया जा सकता है। अनुबन्ध की प्रमुख परिभाषायें निम्न प्रकार है :

(1) न्यायाधीश सालमण्ड (Salmond) के अनुसार, अनुबन्ध एक ऐसा ठहराव है जो पक्षकारों के बीच दायित्व उत्पन्न करता हैऔर उनकी व्याख्या करता है।

भारतीय संविदा अधिनियम, 1872

भारतीय संविदा अधिनियम, 1872

भारतीय संविदा अधिनियम, 1872

किसी राज्य अथवा सरकार द्वारा सामाजिक व्यवस्था को सुचारुरुप से संचालित करने हेतु तथा मानवीय आचरण एवं व्यवहारों को व्यवस्थित तथा क्रियान्वित करने के उद्देश्य से जो नियम बनाये जाते हैं , उन्हें 'सन्नियम' या राजनियम कहा जाता है। सालमण्ड (Salmond) के अनुसार,

कौन देता है शिक्षा?

कौन देता है शिक्षा?

भारत में सरकारी स्कूली शिक्षा के स्तर से सभी इतने मायूस हैं कि। प्राथमिक स्तर पर वही अभिभावक सरकारी स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ाते हैं जिनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं होता। हो सकता है कि इस बात को खुले तौर पर मानने में सरकारी स्कूल के अध्यापकों को थोड़ी शर्म आए (जो पढ़ाने के नाम पर अच्छा-खासा वेतन उठाते हैं।) कि गरीब से गरीब आदमी की भी पसंद सूची में ये अंतिम पायदान पर हैं। आज विशेष रूप से स्कूल स्तर के अध्यापकों की हमारे समाज में कोई इज्जत नहीं है। समाज में गुरू के लिए कभी सम्मान का भाव रहा होगा पर आज वह महज एक वेतन भोगी है। गुरूजी के इस हाल पर बात करें उससे पहले एक नजर इन आंकडों पर जो ह

सफलता के लिय लगन है जरुरी है

सफलता के लिय लगन है जरुरी है

एक बार मशहूर वैज्ञानिक एडिसन अपनी प्रयोगशाला में किसी जरुरी शोध मेंलगे हुए थे। उनके पास ही मेज पर कई कागज रखे
थे, जिनमें
उनकी जरुरी गणना एंथीं। अचानक हवा चली और कागज प्रयोगशाला में बिखर
गए। एडिसन और उनके सहयोगी इन कागजों को समेटने मेंजुट गए। एडिसन इन्हें जोड़कर रखने
के लिए Clip ढ़ूंढ़ने लगे। क्लिप मिली तोले किन वह टेढ़़ी थी और कागजों पर सही ढ़ंग से
लग नहीं पा रही थी। एडिसन उसे सीधी
करने में लग गए। उनके साथी ने उन्हें ऐसा करता देखा तो जाकर Clip का नया पैकेट
ले आया और कागजों में Clip लगाकर रख दिया। कुछ देर

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