ऐसे बढ़ेंगे सफलता की ओर कदम...

ऐसे बढ़ेंगे सफलता की ओर कदम

जीवन में आगे बढ़ने हेतु व्यक्ति निरंतर प्रयासरत रहता है। सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। इसे प्राप्त करने के लिए व्यक्ति को निरंतर मेहनत करनी ही होती है। किसी मुकाम पर पहुंचने के लिए व्यक्ति को अपनी मंजिल का भी पता होना चाहिए। इसके बगैर किया गया प्रयास व्यक्ति को असफलता की ओर ही ले जाता है। 

जीवन में सफल होने के कुछ टिप्स:-

एकाग्रता बढ़ाएं : सफल होने के लिए एकाग्रता का होना जरूरी है। एकाग्रता यानी ‍‍किसी भी एक ही विषय-विशेष पर पूर्ण ध्यान दिया जाना। किसी ‍व्यक्ति को तब तक सफलता नहीं मिल सकती, जब‍ तक कि वह एकाग्र न हो। बिना रुचि के एकाग्र होना काफी मुश्किल है।

समय का महत्व समझें : सफलता प्राप्ति में समय का काफी महत्व है। जिसने समय के महत्व को जान लिया उसने सब कुछ पा लिया। अत: किसी भी लक्ष्य की प्राप्ति हेतु समय-प्रबंधन (Time management) जरूर करें। किसी विद्वान ने ठीक ही कहा है कि 'मैंने समय को खोया, समय ने मुझे'। इसी से पता चलता है कि समय कितना कीमती है। यह भी कहा गया है कि समय ही सोना (Gold) है अत: समय को बरबाद न करें।

अपनी शक्ति-सामर्थ्य का पता करें : अपनी शक्ति-सामर्थ्य का हमें पता होना चाहिए। हमेशा लक्ष्‍य ऐसा चुनें, जो अपनी शक्ति- सामर्थ्य में हो। कभी भी ऐसा लक्ष्‍य चुनने की गलती नहीं करें, जो स्वयं की शक्ति-सामर्थ्य से बाहर हो। उदाहरण के लिए किसी की रुचि कला विषय लेकर दर्शन शास्त्र में सफलता प्राप्त करने की हो तो उसे जबरदस्ती इंजीनियरिंग या डॉक्टरी के लिए प्रयास नहीं करना चाहिए। नहीं तो असफलता ही हाथ लगेगी।

कर्म करते रहें : व्यक्ति को सफलता प्राप्ति हेतु कर्म करते रहना चाहिए, क्योंकि इसी में क्रिया और उसका परिणाम दोनों शामिल हैं। स्वामी विवेकानंद ने भी कहा है कि 'कर्म मानव स्वतंत्रता की शाश्वत घोषणा है। हमारे विचार, शब्द और कर्म वे धागे हैं जिनसे हम अपने चारों ओर एक जाल बुन लेते हैं। हमें अपना कार्य सही व श्रेष्ठ दिशा में ही करना चाहिए।' सही का सही और गलत दिशा का परिणाम भी गलत ही होता है। 

आशावादी बने रहें : व्यक्ति को हमेशा आशावादी ही बने रहना चाहिए। नकारात्मक विचार कभी भी मन में न लाएं। नकारात्मक विचारों से आत्मविश्वास कम होता है अत: हमेशा आशावादी दृष्टिकोण ही अपनाएं। इस बारे में काफी पुरानी एक कहावत भी है कि 'मन जीते जीत है और मन के हारे हार'। अत: सकारात्मक चिंतन श्रेष्ठ रहेगा।

जी-जान से भिड़ जाएं : एक बार मंजिल तय हो जाने के बाद आप जी-जान से सफलता प्राप्ति हेतु भिड़ जाएं। इसमें कोताही बरतना आपके लिए उचित नहीं कहा जाएगा। अपने इरादों पर दृढ़ रहें व डिगें नहीं। कई बार इसमें असफलता के अवसर भी आ सकते हैं किंतु आप अपने दृढ़ संकल्प से उस पर पार पा लेंगे। आप ऐसा ही विश्वास बनाए रखें।

ईश्वर से प्रार्थना भी करें : ईश्वर से प्रार्थना का भी अपना महत्व है। ईश प्रार्थना से हृदय व मन-मस्तिष्क के तार भी झंकृत होते हैं। अनुसंधानों में भी पाया गया है कि नियमित मंदिर जाने तथा भगवान की प्रार्थना करने वाले हमेशा आशावादी बने रहते हैं, क्योंकि उनके मन में यह भाव रहता है कि 'ईश्वर मेरे साथ है।' यह भाव सकारात्मकता की ओर ले जाता है।