कंपनी का आशय एवं प्रकार

Image: 
rksir

कंपनी का आशय

कम्पनी - कम्पनी अधिनियम द्वारा आयोजित सतत उत्त्रदिकर वाला एक व्यक्ति कृत्रिम व्यक्ति है जिसकी एक सर्वमान्य पहचान मुद्रा होती है इस प्रकार कम्पनी लाभ के उद्देश्य से खोली गई एक स्थायी संस्था है

जिसकी सदस्यों द्वारा दी गई एक संयुक्त पूँजी होती है जो अंशों में विभक्त होती है जिसका एक या अधिक अंश प्रतेक सदस्य के अधिकार में होता है

प्रो.अल्फ्रेड के अनुसार कम्पनी एक कृत्रिम व्यक्ति है जिसका निर्माण संविधान के द्वारा किया जाता है इसकी अपनी संयुक्त पूँजी होती है जो प्रायः छोटे-छोटे अंशों में बाटी होती है जो विधान मण्डल संचालक

 

मण्डल सदस्यों  द्वारा अधिगृहित होती है"

 

भारतीय कम्पनी अधिनियम १९५६  के "अनुसार कम्पनी से आशय अधिनियम के आधीन ऐसी संस्था है जिसका निर्माण वा रजिस्ट्री पिछले अधिनियम के अनुसार होता है"

 

कम्पनी के प्रकार

1-अंशों द्वारा सीमित दायित्व वाली कम्पनी -इस प्रकार की कम्पनी में अंशधारी का दायित्व भुगतान की गई राशी के बराबर होता है

 

2- गारंटी द्वारा सीमित दायित्व बाली कम्पनी - इस प्रकार की कम्पनी में अंशधारी का दायित्व सीमानियम द्वारा उस रकम तक सीमित होता है जितना कम्पनी के सदस्य द्वारा भुगतान का वचन दिया जाता है

 

3- असीमित दायित्व वाली कम्पनी -  इस प्रकार की कम्पनी प्रायः बहुत ही कम पाई जाती हैं इस प्रकार की कम्पनी बड़े साझेदारी की तरह होती है इस प्रकार की कम्पनियों के समापन के समय व्यक्तिगत

 

संपत्तियों तक पहुँच जाती है

 

4- प्राइवेट कम्पनी  -  इसका आशय एक ऐसी कम्पनी से होता है जो अपने अंतर्निम्यों के द्वारा निर्मित होती है इनके निम्न लक्षण होते हैं

 

a) अपने अंशों के हस्तान्तार्ण पर प्रतिबन्ध लगा सकती हैं

b) अपनें सदस्यों की संख्यां २से ५०तक रख सकती हैं

 

5- पब्लिक कम्पनी - इन्हें संयुक्त कम्पनी भी कहा जाता है इस प्रकार की कम्पनी की  प्रायः छोटे-छोटे अंशों में बाटी होती है  इस प्रकार की कम्पनी समामेलन के आधार पर तैयार की जाती हैं

Subject: