कुछ टिप्स इंटरव्यू के लिए

 कुछ टिप्स इंटरव्यू के लिए

अगर ढेर सारी पढ़ाई करने के बावजूद आप अपने आपको और अर्जित ज्ञान को प्रस्तुत करना नहीं जानते तो, हो सकता है इंटरव्यू की कठिन दौड़ में पिछड़ जाएँ। 

ऐसे में कुछ साधारण, लेकिन महत्वपूर्ण बातों को ध्यान में रखकर आप जंग जीत सकते हैं।

उच्च शिक्षा और कड़ी प्रतियोगिता आधुनिक जीवन शैली के अहम भाग बन चुके हैं। शिक्षा में उत्तम योग्यता के साथ-साथ उसका प्रस्तुतीकरण भी अत्यंत अहम बन गया है। 

केवल परीक्षा में अच्छे अंक लाकर सर्टिफिकेट हासिल करना ही सफलता का मापदंड नहीं रह गया है, बल्कि इंटरव्यू में उसका व्यावहारिक प्रदर्शन भी अति आवश्यक हो गया है। 

आमतौर पर लिखित परीक्षा की तैयारी तो किताबों द्वारा करना आसान है, पर इंटरव्यू आपके व्यक्तित्व प्रदर्शन का जरिया है। इसलिए सचेत होकर अपने व्यक्तित्व को सँवारकर ही इस कसौटी पर उतरिए। 

इंटरव्यू में सफलता का प्रथम आधार आपकी संबंधित विषय की तैयारी है। संबंधित विषय का सारगर्भित और उत्तम ज्ञान ही वह प्रथम कुंजी है, जहाँ से सफलता की राहें खुलती हैं। 

कई बार अच्छा आत्मविश्वास भी इंटरव्यू लेने वालों को आकर्षित करता है। पर बिना ज्ञान केवल आत्मविश्वास या अच्छा ज्ञान और कमजोर आत्मविश्वास- दोनों ही स्थितियों से बचिए। 

संतुलित व्यक्तित्व का प्रदर्शन कीजिए। जो भी प्रश्न पूछा जाए, उसका उत्तम शिष्टाचार के साथ संतुलित शब्दों में जवाब दीजिए। 

कई बार प्रश्न का जवाब आने पर प्रतियोगी अपना सारा ज्ञान एक प्रश्न के जवाब में देने लगते हैं। इस तरह का प्रदर्शन इंटरव्यू लेने वाले को बोर भी कर सकता है। 

सामान्य शिष्टाचार (अभिवादन, बैठने के लिए आज्ञा आदि) को तो भूलिए ही मत, साथ ही अपनी वेशभूषा का भी ध्यान रखिए। 
साधारण व गरिमामय वेशभूषा आपके व्यक्तित्व को निखारने में मदद करती है।

'बॉडी लैंग्वेज' को नियंत्रित रखिए। हड़बड़ाहट में फाइल गिराना, बार-बार हाथ हिलाना या पसीना पोंछना आपके आत्मविश्वास की कमी को प्रदर्शित करने वाली हरकतें हैं। 

इसलिए इंटरव्यू में जाने से पहले आइने के सामने या दोस्तों, परिवार के सदस्यों के सामने अभ्यास करिए ताकि ऐन वक्त पर कोई गड़बड़ी न हो। 

बॉडी लैंग्वेज के साथ-साथ आवाज की स्थिरता को भी बनाए रखिए। कुछ शब्दों का बार-बार प्रयोग, आवाज में कंपन, जल्दी-जल्दी या हड़बड़ाकर बोलना ऐसी गलतियाँ हैं, जो अधिकांशतः जल्दबाजी में लोगों से होती हैं।

अच्छा ज्ञान व योग्यता होने के बावजूद ऐसे लोग इंटरव्यू में असफल हो जाते हैं।

अपनी योग्यता व अनुभव के बारे में आत्मविश्वास से कहिए। 'हाँ आता तो है' या 'थोड़ा पता है' जैसे वक्यांशों का प्रयोग करने से बचिए। 

यदि किसी विषय में आप न भी जानते हों तो कह सकते हैं 'माफ कीजिए, इस विषय में नहीं जानता, पर मेरी जिज्ञासा व कोशिश से यह सीखना मेरा उद्देश्य बन सकता है यदि आप अवसर दें तो'। 

जो भी बात कहें, उसमें आपका आत्मविश्वास व संस्थान के प्रति अच्छा कार्य करने की इच्छा प्रकट होनी चाहिए। 

व्यक्तित्व के कमजोर पहलुओं को प्रकट न होने दें। पहले से ही इस तरह अभ्यास कीजिए या अपनी कमजोरी को भी अपनी खूबी की तरह दिखाइए। 

मसलन आपकी प्रवृत्ति हर काम को आराम से करने की है तो यह कहने की बजाय कि 'मैं काम जल्दी पूरा नहीं कर सकता' यह कहिए कि 'मैं धैर्य के साथ काम करना पसंद करता हूँ और जल्दबाजी अच्छे काम को भी खराब कर देती है।' 

अपनी खूबियों के प्रदर्शन के समय यह ध्यान रखिए कि अति प्रदर्शन न हो। क्योंकि जो व्यक्ति आपसे प्रश्न पूछ रहा है, निश्चित रूप से वह आपसे अधिक जानकार है। 

इसलिए समय-समय पर उसे अपनी सुपीरियटी का अहसास कराते रहें। वरना आपका अति आत्मविश्वास व अति प्रतिभा प्रदर्शन भी आप के सिलेक्ट न होने की वजह बन सकता है। 

व्यावहारिक ज्ञान को भूलिए मत। आमतौर पर सैद्धांतिक ज्ञान की परीक्षा तो लिखित परीक्षा में हो जाती है, पर आप व्यावहारिक तौर पर कितने सक्षम हैं? 

यह बात इंटरव्यू में जाँची जाती है। इसीलिए प्रश्नकर्ता के प्रश्न पूछने पर पहले धैर्यपूर्वक सोचिए कि वह आपसे किस तरहके जवाब की अपेक्षा कर रहा है? 

जहाँ तक संभव हो, प्रश्न के व्यावहारिक पहलू का जवाब पहले दीजिए, जरूरत होने पर ही सैद्धांतिक ज्ञान की।

तो यदि आप भी सफल होना चाहते हैं तो इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखिए। फिर देखिए, सफलता के परचम लहराना कितना आसान है।

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