बैंकों ने घटा दीं जमा दरें

बैंकों ने घटा दीं जमा दरें

आरबीआई द्वारा मंगलवार को अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में दरों में कटौती के बाद कुछ बैंकों ने अपनी जमा दरें घटा दी हैं। अन्य बैंकों के भी जल्द ऐसा ही करने की संभावना है। आरबीआई ने कल अपनी नीतिगत समीक्षा में रीपो दर 25 आधार अंक घटाई थी। रीपो दर वह दर होती है, जिस पर बैंक आरबीआई से पैसा उधार लेते हैं। सरकारी क्षेत्र के पंजाब नैशनल बैंक ने चुनिंदा परिपक्वता अवधि वाली घरेलू सावधि जमाओं पर ब्याज दर 25 आधार अंक घटाई है। नई दरें 8 जून से लागू हो जाएंगी। वहीं निजी क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक आईसीआईसीआई बैंक ने 1 करोड़ रुपये से अधिक की जमाओं पर दरें 15 से 30 आधार अंक कम की हैं। देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने मंगलवार को आधार दर में कटौती के साथ ही लघु अवधि की जमाओं पर ब्याज दर में 25 से 50 आधार अंक की कमी की थी। 

 

हालांकि केंद्रीय बैंक के सख्त रुख की वजह से नीतिगत समीक्षा बॉन्ड बाजार के लिए फायदेमंद नहीं रही है। नीतिगत समीक्षा के बाद बॉन्ड प्रतिफल बढऩे लगा था और यह रुझान बुधवार को भी जारी रहा। दूसरी ओर रुपये के लिए गिरावट जारी रही, क्योंकि निवेशकों ने घरेलू बाजार में अपने निवेशों की  बिक्री की। इक्रा में सह-प्रमुख (वित्तीय क्षेत्र रेटिंग) विभा बत्रा ने कहा कि बैंकों के लिए सावधि जमाओं पर ब्याज दरों में बड़ी कटौती करना बहुत मुश्किल है, क्योंकि वैकल्पिक बचत योजनाओं में ऊंची दरें हैं। वे (बैंक) बड़ी जमाओं को कॉल दरों के मुताबिक रखने पर ध्यान केंद्रित करेंगे। बैंक पिछले साल अक्टूबर से सावधि जमाओं पर ब्याज दरें घटा रहे हैं। दरों में कटौती के वर्तमान चरण में कटौती की मात्रा 2014-15 के बराबर नहीं होने के आसार हैं। इस साल जनवरी से रीपो दर 75 आधार अंक घटाई जा चुकी है और इस समय यह 7.25 फीसदी है। 

 

इस बीच बुधवार को नए 10 साल के बॉन्ड पर प्रतिफल बढ़कर 7.74 फीसदी हो गया, जो मंगलवार को 7.72 फीसदी पर बंद हुआ था। पुराने 10 साल के बॉन्ड पर प्रतिफल 7.95 पर बंद हुआ, जिसका पिछला बंद स्तर 7.93 फीसदी था। कल आरबीआई की नीतिगत समीक्षा के बाद नए और पुराने 10 साल के बॉन्ड पर प्रतिफल क्रमश: 8 फीसदी और 11 फीसदी बढ़कर बंद हुआ। एक्सिस म्युचुअल फंड के फिक्स्ड इनकम के प्रमुख आर शिवकुमार ने कहा, 'पिछली रात वैश्विक बॉन्ड बाजार में भी प्रतिफल बढ़ा और इसका अनुसरण करते हुए आज प्रतिफल में इजाफा हुआ है। कल दरों में कटौती पर भी भविष्य की राह धुंधली नजर आई। हालांकि समष्टि आर्थिक स्थितियों ने दरों में कटौती का माहौल बनाया, लेकिन तेल की कीमतों में वृद्धि और मॉनसून से संबंधित चिंताओं के कारण निकट भविष्य में महंगाई बढऩे का जोखिम बढ़ा है। 

 

कॉरपोरेट बॉन्ड प्रतिफल भी ऊंची बनी हुई है। इसलिए निर्गम प्रबंधकों का कहना है कि कंपनियां बॉन्ड के जरिये फंड जुटाने के लिए आगे नहीं आईं, क्योंकि यह उनके लिए महंगा पड़ेगा। बुधवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 63.91 पर बंद हुआ, जो मंगलवार को 63.83 पर बंद हुआ था। इन्ट्रा डे कारोबार के दौरान रुपया 64 से भी आगे निकल गया और 64.07 प्रति डॉलर के निचले स्तर को छू गया। मेकलाइ ऐंड मेकलाइ में फॉरेक्स सलाहकार और डीलर संदीप गोंजाल्वेज ने कहा, 'विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) के घरेलू बाजार से निकलने और कंपनियों की कुछ डॉलर मांग के कारण रुपये में कमजोरी आई। रुपये की अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय बैंक ने आज बाजार में हस्तक्षेप किया।'