सफलता का मूल मंत्र हैं एकाग्रता

सफलता का मूल मंत्र हैं एकाग्रता

प्रायः लोग अपनी असफलताओं के प्रति स्वयं के उत्तरदायित्व से बचने के लिए तमाम प्रकार के बहानों व कारणों को जिम्मेदार ठहराते हैं। वे इस बात को समझने में पूरी तरह विफल हैं कि असली समस्या उनकी अपनी  मनोवृत्ति में है…

सफलता के लिए उचित मनोवृत्ति का होना आवश्यक है, क्योंकि जैसी मनोवृत्ति होगी, वैसा ही व्यवहार होगा। जैसा व्यवहार होगा, वैसे ही कार्य होंगे । जैसे कार्य होंगे, परिणाम भी उसी के अनूकुल होगा, । प्रायः लोग  अपनी असफलताओं के प्रति स्वयं के उत्तरदायित्व से बचने के लिए तमाम प्रकार के बहानों व कारणों को जिम्मेदार ठहराते हैं। वे इस बात को समझने में पूरी तरह से विफल हैं कि असली समस्या उनकी अपनी मनोवृत्ति ही  है, जो हमारे जीवन का निर्माण करती है। इसी के द्वारा हमारी सफलताएं व असफलताएं निर्देशित होती हैं। विभिन्न क्षेत्रों के सफल व्यक्तियों के इतिहास  की गहराई से पड़ताल करने पर पता चलता है कि उनकी मनोवृत्ति सभी  कर्त्तव्यों के उत्तरदायित्व को अपने ऊपर  लने की होती है, ऐसे लोग बहानों में विश्वास नहीं करते और न ही अपनी  समस्याओं के लिए दूसरों को दोषी ठहराते हैं। आप किसी भी चीज को सकारात्मक अथवा नकारात्मक दृष्टि से देख सकते हैं। हमारी सोच सभी सफलताओं , समस्त सांसारिक प्राप्तियों, सभी महान खोजों एवं आवािष्कारों तथा समस्त उपलब्धियों का मौलिक स्रोत होती है। हमारे विचार हमारे  कैरियर  और वास्तव  में हमारे दैनिदिन जीवन के निर्धारक होते हैं, विचार सभी कार्यों के पीछे के मार्ग निर्देशक बल होते। हमारे कार्य अनजाने में हमें सफलता या असफलता की तरफ ले जाते हैं।  विचार मनुष्य को  बना देते हैं या तोड़ देते हैं। महान धर्म गुरुओं द्वारा  ब्रह्मांड, ब्रह्मांडीय मस्तिष्क को सोच द्वारा सृजित किया गया है। यह  ब्रह्मांडीय मस्तिक सूचनाओं का महा राजपथ है, जो सभी मानव मस्तिष्कों को एक साथ जोड़ता है। हम काफी हद तक दूसरों द्वारा समाचार पत्र, चलचित्र रेडियो और आकस्तिक भेंट मुलाकातों के दौरान एक छोटे से विचार के माध्यम से भी एक अलग ढांचे में ढाल दिए जाते हैं। हमारे  ऊपर  हर समय लगातार विभिन्न डिग्री के विचारों की बमबारी होती रहती है। इनमें से कुछ हमारे अंदर की आवाज के साथ मेल खा सकते हैं और महान दृष्टि प्रदान कर सकते हैं। सफलता की कला वास्तव में हमारे मस्तिष्क के दक्षातापूर्ण संचालन की एक कला है। सफलता हमारे भीतर ही निहित होती है। उसे बाहर निकालने के लिए प्रयास की आवश्यकता होती है। यदि हमारे प्रयास सकारात्मक होते हैं, तो हम सफलता की ओर बढ़ जाते हैं और यदि हमारे प्रयास नकारात्मक होते हैं, तो हम सफलता से दूर होते चले जाते हैं। हमारे मनोभावों का हमारी जिंदगी में बड़ा महत्त्व होता है। हमारे मन के भाव ही हमारे जीवन की दिशा को तय करते हैं। हम जीवन में कितना ऊपर जाएंगे, यह इस बात पर निर्भर करता है कि हमारी मनोवृत्ति किस तरह की है। हमारे जीवन का हर एक पक्ष हमारे मन द्वारा ही नियंत्रित होता है। हमारी सफलता- असफलता सब मनोवृत्ति पर निर्भर करती है। यदि हम अपने मन को किसी एक विषय पर फोकस कर लें, तो कोई वजह नहीं कि हम अपने लक्ष्य को हासिल न कर सकें। कोई भी लक्ष्य हासिल करने के लिए एकाग्रता जरूरी है और इस एकाग्रता में मन अपनी अहम भूमिका निभाता है। जब हम एकाग्र हो गए तो समझो हम सफल हो गए।