अंतरराष्ट्रीय योग दिवस : भारतीय विरासत की वैश्विक पहचान

“मेरे प्यारे देश वासियों! याद है 21 जून?

लेखा के नियम (Rule of Accountancy in Hindi )

 लेखा के नियम (Rule of Accountancy in Hindi )

हर लेन - देन दो खातों को प्रभावित करता है. इसीलिए इसे दोहरी प्रविष्टि प्रणाली बहीखाता कहा जाता है. 

 

लेखा के स्वर्ण नियम (Golden Rule of Accountancy)

 

पर्सनल A/C

रियल A/C

नॉमिनल A/C

डेबिट - प्राप्तकर्ता (पाने वाले) को

(Debit The Receiver)

डेबिट  - जो आता है

Debit What Comes In

डेबिट - खर्च और हानि

(Basics of Accounting) लेखा की मूल बातें

(Basics of Accounting) लेखा की मूल बातें

मूल रूप से  तीन प्रकार  के खातों का उपयोग लेनदेन के लिए किया जाता है. 

1. व्यक्तिगत खाता (Personal Accounts) 
2. वास्तविक खाता (Real Accounts)
3. आय - व्यय खाता (Nominal Accounts) 

व्यक्तिगत खाता :   यह खाता व्यक्ति या निजी खातों से सम्बंधित है.  उदाहरण के लिए
• व्यक्ति (Person)
• बैंक (Bank)
• आपूर्तिकर्ता (Suppliers)
• ग्राहक (Customers)
• लेनदारों (Creditors)
• फर्म (Firm)
• पूंजी (Capital)

पुस्तपालन (बुककीपिंग) तथा लेखाकर्म (एकाण्टैंसी) में अन्तर

पुस्तपालन (बुककीपिंग) तथा लेखाकर्म (एकाण्टैंसी) में अन्तर

1    अर्थ                                             पुस्तपालन का अर्थ व्यापारिक लेन-देन को प्रारम्भिक                                         लेखाकर्म से आशय है प्रारम्भिक पुस्तकों व खातों की सूचनाओं से अन्तिम खाते 
                                                        पुस्तकों व खातों में लिखना होता है।                                                                  बनाना व व्यावसायिक निष्कर्षों को ज्ञात करना व उनका विश्लेषण करना।

कुछ कदम सफलता की ओर

कुछ कदम सफलता की ओर

1. सही रास्ता चुनें

हम तभी कुछ हासिल करते हैं, जब एक टारगेट बनाकर उसी ओर चलते रहते हैं। ऐसा करने से हमें सक्सेस मिलती है, लोग हमारी तारीफ करते हैं। हमारी कामयाबी का गुणगान भी करते हैं। हमें भी खुशी मिलती है, लेकिन यह तभी संभव है, जब हम सही रास्ते पर चलें। इस बात का ध्यान रखें कि गलत रास्ते पर चलकर कभी सक्सेस नहीं मिल सकती। करियर बनाने के लिए हमें बस एक ही राह पर चलना चाहिए। बस, उसी राह को पकडकर आप भी आगे बढते रहें।

2. जरूरी हैं एटिकेट्स

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