वैदिक वाड्.मय से निकला है विज्ञानं

वैदिक वाड्.मय से निकला है विज्ञानं

संस्कृत का सर्वाधिक प्राचीन साहित्य तो वेद ही है,ये भारतीय चिन्तन एवं भारतीय ज्ञान विज्ञान के लिए भी सर्वाधिक प्राचीन प्रामाणिक ग्रन्थ है। उन दिनों भी भारत मंे विज्ञान के कई क्षेत्र विकसित थे। भौतिकषास्त्र, रयायनषास्त्र, वनस्पतिषास्त्र, कृषिविज्ञान, गणितषास्त्र, नक्षत्रविज्ञान, जीवविज्ञान, धातुविज्ञान विज्ञान,आयुर्वेद,स्थापत्य विज्ञान,षिल्पषास्त्र,विमान विज्ञान एवं कलाकौषल का अध्ययन अध्यापन एवं प्रयोग प्रचुरता में मिलता था । वैदिक वाड्.मय में अनेक स्थलों पर विज्ञान के विकसित स्वरूप का विवरण प्राप्त होता है। अष्विनी कुमारों द्वारा उपमन्यु की नेत्रज्योति वापस ला देना,अनसूया द्वारा शाण्डिली के

विश्व योग दिवस पर योग भारती के साथ मनाएगी दक्ष कोचिंग

विश्व योग दिवस पर योग भारती के साथ मनाएगी

21 को होने वाले अंतर्राष्ट्रीय विश्व योग दिवस पर आयोजित कार्यक्रम के लिए दक्ष कोचिंग योग भारती के साथ हिस्सा लेगी इस कार्यक्रम को बड़े स्तर पर मनाने के लिए कोचिंग के संचालक श्री गंगवार ने योग भारती का सहयोग करने को कहा है 

इस कार्यक्रम में देश के किसानों के साथ काम करने वाली एक बड़ी संस्था kisanhelp भी इस संस्था के साथ भाग लेगी I 

Daक्ष Carrer Point परिवार ने दी गणतंत्र दिवस पर देशवासियो को बधाई

Daक्ष Carrer Point पर आज गणतंत्र दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में कोचिंग के निदेशक श्री सिंह ने कहा कि आज का दिन यह सोचने का नही है कि भारत ने हमे क्या दिया, आज हमे इस पर विचार करना है कि भारत के लिए हमने क्या किया, हमारा क्या योगदान है। किसी भी देश की पहचान उसके देशवासियों से होती है, उनके विचारों से होती है, उनकी लगन, मेहनत और इच्छा-शक्ति से होती है। आज विश्व हमारी तरफ़ आशा भरी निगाहों से देख रहा है, आइए गणतन्त्र दिवस के पावन पर्व पर शपथ लें कि हम देश के लिए योगदान करेंगे, कुछ ऐसा योगदान जो देश को और आगे ले जा सके। गणतंत्र दिवस को संविधान स्थापना के समारोह के रूप में मनाया जाता है तो इसमें कुछ

प्रदूषण के खर दूषण

प्रदूषण के खर दूषण

पर्यावरण की नाक कब की कट चुकी है। रक्तस्राव सी ग्लोबल वार्मिंग तेजी से बढ़ रही है। दुनिया के पर्यावरण को तहस नहस करने वाली खर दूषण सेना अब इसे बचाने की जिम्मेदारी का पाठ गरीब और विकासशील देशों को पढ़ा रही है।

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जलवायु परिवर्तन के खतरे से बचाने वाले उपाय की उपेक्षा

जलवायु परिवर्तन के खतरे से बचाने वाले उपाय की उपेक्षा

जलवायु परिवर्तन के खतरों और कार्बन डाई ऑक्साइड को खपाने में अहम योगदान देने वाले जिस सबसे महत्वपूर्ण घटक पीपल की महत्ता प्रधानमंत्री मोदी ने पेरिस महासम्मेलन के दौरान दुनिया को तो बताई, उसी पीपल की अपने देश में ही उपेक्षा हो रही है।

प्रधानमंत्री ने सम्मेलन में कहा था कि जलवायु परिवर्तन के खतरों से निपटने में पीपल बहुत अहम है। पीपल प्रकृति का अविभाज्य हिस्सा है और बिना इसके प्रकृति के बारे में सोचा नहीं जा सकता। पीएम के कथन के आइने में अमर उजाला ने शोध-संस्थानों, आप-पास पीपल पर नजर डाली तो पता चला कि इस पर शोध प्रोजेक्ट न के बराबर हैं, पौध नर्सरियों में भी पीपल की उपेक्षा है।

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