सफलता का मूल मंत्र हैं एकाग्रता

सफलता का मूल मंत्र हैं एकाग्रता

प्रायः लोग अपनी असफलताओं के प्रति स्वयं के उत्तरदायित्व से बचने के लिए तमाम प्रकार के बहानों व कारणों को जिम्मेदार ठहराते हैं। वे इस बात को समझने में पूरी तरह विफल हैं कि असली समस्या उनकी अपनी  मनोवृत्ति में है…

अंशो के प्रकार ( Types of shares )

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अंशो के प्रकार ( Types of shares )- अंश दो प्रकार के होते है

1. अधिमान  या पूर्वाधिकार अंश (Prefrenece Shares)

2. साधारण या समता अंश    (Equity Shares )

1. अधिमान  या पूर्वाधिकार अंश (Prefrenece Shares):-

  पूर्वाधिकारी अंशों से आशय उन अंशों से होता है जो निम्न शर्तों की पूर्ति करता हो

a) उन अंशों पर लाभांश की दर निश्चित हो

b)  कम्पनी के विघटन के समय उस राशी का भुगतान पहले किया जाता है

2. साधारण या समता अंश    (Equity Shares )  :

अंश पूँजी क्या है एवं कितने प्रकार की होती है

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पूँजी (capital) -  पूँजी से आशय उस राशि से है जिसका प्रयोग कम्पनी की चल अथवा अचल संपत्ति को क्रय करने के लिए किया जाता है  पूँजी के बिना किसी कम्पनी का व्यापर आरम्भ नही किया जा सकता है  दुसरे शव्दों में कह सकते हैं कि पूँजी किसी भी व्यवसाय की मेरुदण्ड होती है यह कम्पनी के पार्षद सीमा नियम में उल्लेखित होती है

 

अंश पूँजी (share capital ) -  पूँजी के छोटे- छोटे भाग को हम अंश कहते हैं  कम्पनी के अपनी  पूँजी एकत्रित करने के लिए कम्पनी अपनी पूँजी कोछोते - छोटे हिस्सों में बाँट देती है जिसमें प्रतेक हिस्से को अंश कहा जाता है 

पार्षद सीमानियम एवं पार्षद अन्तेर्नियम

पार्षद सीमानियम (memorandum)

-पार्षद सीमा नियम से आशय उस नियम से है जो मूलतः कम्पनी अधिनियम के आधार पर तैयार किया गया है इस पर समय  - समय पर परिवर्तनहोते है यह कम्पनी का जन्मपत्र होता हो इसमें कम्पनी के रूपरेखा उसका कार्यक्षेत्र उसकी पूँजी सी सीमा निर्धारित कर दी जाती है 

 1- Name of Company                                  (Last word is Ltd.)

 2-Address                                                 (Where is Head office )

कंपनी का आशय एवं प्रकार

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कंपनी का आशय

कम्पनी - कम्पनी अधिनियम द्वारा आयोजित सतत उत्त्रदिकर वाला एक व्यक्ति कृत्रिम व्यक्ति है जिसकी एक सर्वमान्य पहचान मुद्रा होती है इस प्रकार कम्पनी लाभ के उद्देश्य से खोली गई एक स्थायी संस्था है

जिसकी सदस्यों द्वारा दी गई एक संयुक्त पूँजी होती है जो अंशों में विभक्त होती है जिसका एक या अधिक अंश प्रतेक सदस्य के अधिकार में होता है

प्रो.अल्फ्रेड के अनुसार कम्पनी एक कृत्रिम व्यक्ति है जिसका निर्माण संविधान के द्वारा किया जाता है इसकी अपनी संयुक्त पूँजी होती है जो प्रायः छोटे-छोटे अंशों में बाटी होती है जो विधान मण्डल संचालक

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