कंपनी का आशय एवं प्रकार

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कंपनी का आशय

कम्पनी - कम्पनी अधिनियम द्वारा आयोजित सतत उत्त्रदिकर वाला एक व्यक्ति कृत्रिम व्यक्ति है जिसकी एक सर्वमान्य पहचान मुद्रा होती है इस प्रकार कम्पनी लाभ के उद्देश्य से खोली गई एक स्थायी संस्था है

जिसकी सदस्यों द्वारा दी गई एक संयुक्त पूँजी होती है जो अंशों में विभक्त होती है जिसका एक या अधिक अंश प्रतेक सदस्य के अधिकार में होता है

प्रो.अल्फ्रेड के अनुसार कम्पनी एक कृत्रिम व्यक्ति है जिसका निर्माण संविधान के द्वारा किया जाता है इसकी अपनी संयुक्त पूँजी होती है जो प्रायः छोटे-छोटे अंशों में बाटी होती है जो विधान मण्डल संचालक

जरा याद करले उनको ............................जो लौट कर घर न आये

जरा याद करले उनको ............................जो लौट कर घर न आये

 15 अगस्त 1947  से  पहले हम अंग्रेजों के गुलाम थे। उनके बढ़ते हुए अत्याचारों से सारे भारतवासी त्रस्त हो गए और तब विद्रोह की ज्वाला भड़की और देश के अनेक वीरों ने प्राणों की बाजी लगाई, गोलियां खाईं और अंतत: आजादी पाकर ही चैन ‍लिया।  पहले हम अंग्रेजों के गुलाम थे उनके बढ़ते हुए अत्याचारों से सारे भारतवासी त्रस्त हो गए और तब विद्रोह की ज्वाला भड़की और देश के अनेक वीरों ने प्राणों की बाजी लगाई, गोलियां खाईं और अंतत: आजादी पाकर ही चैन ‍लिया।इसी दिन हमने अत्याचारी ब्रितानी हुकूमत के बाद आजादी का पहला सूरज देखा था।  वह दिन  15 अगस्त 1947 था इस दिन हमारा देश आजाद हुआ, 

महान वैज्ञानिक डॉ कलाम को Daक्ष Carrer Point परिवार की श्रद्धांजलि

डॉ कलाम को  श्रद्धांजलि

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम अब नहीं रहे। राष्ट्र ने वास्तविक भारत रत्न को खो दिया।भारत ने अपना मिसाइल मैन को खो दिया है। डॉ. कलाम एक सच्चे राष्ट्रभक्त और विज्ञान, शिक्षा और नैतिकता के दुर्लभ संयोजन थे।कलाम को देश के पूर्व राष्ट्रपति के तौर पर ही याद नहीं रखा जाएगा बल्कि उनकी मेहनत के लिए भी उन्हें कभी नहीं भुलाया जा सकता। कलाम हमेशा नौजवानों को प्रेरणा देने का काम करते रहेंगे। 

उनको शत शत नमन    

डॉ. राधा कान्त

स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है

स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है

दुनिया में स्वास्थ्य से बढ़कर कुछ भी नहीं होता और शरीर अगर स्वस्थ हो तो सब कुछ अच्छा लगता है, दिल को सुकून मिलता है लेकिन अगर हम थोड़ा भी बीमार पड़ते हैं तो सारी दुनिया अधूरी सी लगने लगती है। इसलिए स्वास्थ्य को सबसे बड़ा धन भी कहा गया है लेकिन वर्तमान परिवेश और हमारी जीवन-शैली ने लोगों को अस्वस्थ होने पर मजबूर कर दिया है। क्या इस अस्वस्थता के लिए हमारे द्वारा निर्मित दूषित परिवेश और जीवन-शैली सर्वाधिक जिम्मेदार नहीं है?

सफलता के लिए क्या करें क्या न करें

जीवन में सफलता की बुलंदी पर हर इंसान पहुंचना चाहता है लेकिन हर कोई इसे हासिल नहीं कर पाता है। असफल होने के कई कारण है, जिनमें से एक जीवन में सही ढंग से प्लानिंग का न होना है। हम यहां आपको सफलता के कुछ मंत्र बताने जा रहे हैं जिसे अपनाकर आप भी जीवन में सफल बन सकते हैं...

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