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आवश्यकता से अधिक आवेदन पत्र प्राप्त होने पर

आवश्यकता से अधिक आवेदन पत्र प्राप्त होने पर

आवश्यकता से अधिक आवेदन पत्र प्राप्त होने पर

कभी कभी कम्पनी के पास निर्गमित किये गए अंशों से अधिक आवेदन प्राप्त हो जाते हैं तो कम्पनी के संचालकों द्वारा निम्न में से दो विधियाँ अपनाई जाती है

1 – आवश्यकता से अधिक आये आवेदन को वापस करना :- इस विधि में कम्पनी प्राप्त आवेदनों में से जितने अंश निर्गमन करने का प्रविवरण दिया हैं उतने आवेदनों को अंश निर्गमित करके अतिरिक्त आवेदनों को वापस कर देती है I

जर्नल लेखा

Share application  a/c                                         Dr.

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    To bank a/c

अंशों का प्रीमियम पर निर्गमन

share issued at Primium

अंशों का प्रीमियम  पर निर्गमन (share issued at Primium)

कोई भी कम्पनी अपने अंशपत्रों का निर्गमन अपने अंकित मूल्य से अधिक पर कर सकती है जैसे किसी कम्पनी कके अंश का अंकित मूल्य  10 रू. है और वह उसे 12 रू. में विक्रय करती है तो यह २ रू. अधिक मूल्य ही अधिमूल्य या प्रीमियम कहलायेगा यह कम्पनी के लिए पूंजीगत लाभ माना जाता है

प्रीमियम का लेखा Alloutment  के साथ किया जाता है कभी –कभी प्रीमियम का लेखा अलग – अलग याचना पर भी किया

 

जर्नल लेखा

 

Share alloutment a/c                                         Dr.

अंशो का बट्टे पर निर्गमन

अंशो का बट्टे पर निर्गमन

अंशो का बट्टे पर निर्गमन

कंपनी अधिनियम की धरा 79 के अनुसार कोई कम्पनी अपने अंश पत्रों का निर्गमन अपने अंशों के अंकित मूल्य से अधिक पर कर सकती है अर्थात कोई अंश धारक अंकित मूल्य से कम धनराशि देकर अंशों के पूरे मूल्य का स्वामी हो जाता है  यह केवल व्ही कम्पनी ही कर सकती है जिन्होंने अपनी सेवाए एक वर्ष दे दी हो या अपने व्यवसाय का एक वर्ष पूर्ण कर चुकी हो

अंशो के प्रकार ( Types of shares )

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अंशो के प्रकार ( Types of shares )- अंश दो प्रकार के होते है

1. अधिमान  या पूर्वाधिकार अंश (Prefrenece Shares)

2. साधारण या समता अंश    (Equity Shares )

1. अधिमान  या पूर्वाधिकार अंश (Prefrenece Shares):-

  पूर्वाधिकारी अंशों से आशय उन अंशों से होता है जो निम्न शर्तों की पूर्ति करता हो

a) उन अंशों पर लाभांश की दर निश्चित हो

b)  कम्पनी के विघटन के समय उस राशी का भुगतान पहले किया जाता है

2. साधारण या समता अंश    (Equity Shares )  :

पार्षद सीमानियम एवं पार्षद अन्तेर्नियम

पार्षद सीमानियम (memorandum)

-पार्षद सीमा नियम से आशय उस नियम से है जो मूलतः कम्पनी अधिनियम के आधार पर तैयार किया गया है इस पर समय  - समय पर परिवर्तनहोते है यह कम्पनी का जन्मपत्र होता हो इसमें कम्पनी के रूपरेखा उसका कार्यक्षेत्र उसकी पूँजी सी सीमा निर्धारित कर दी जाती है 

 1- Name of Company                                  (Last word is Ltd.)

 2-Address                                                 (Where is Head office )

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