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सीमित देयता साझेदारी (एलएलपी)

सीमित देयता साझेदारी

सीमित देयता साझेदारी (एलएलपी) को एक वैकल्पिक निगमित व्यवसाय साधन के रूप में देखा जाता है, जो सीमित देयता के लाभ देती हैं किंतु इसके सदस्यों को यह लचीलापन उपलब्ध होता है कि वे अपनी आंतरिक संरचना को परस्पर सहमत करार पर आधारित साझेदारी के रूप में गठित कर सकें। एलएलपी स्वरूप के परिणामस्वरूप किसी भी प्रकार की सेवाएँ प्रदान करने वाले अथवा वैज्ञानिक और तकनीकी विषयों से संबंधित काम करने वाले उद्यमी, प्रोफेशनल तथा उद्यम अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप वाणिज्यिक रूप से कार्यकुशल साधन गठित कर सकते हैं। इसके ढाँचे और परिचालन में लचीलेपन के फलस्वरूप, एलएलपी लघु उद्यमों के लिए तथा उद्यम पूंजी द्वारा निवेश के ल

आवश्यकता से अधिक आवेदन पत्र प्राप्त होने पर

आवश्यकता से अधिक आवेदन पत्र प्राप्त होने पर

आवश्यकता से अधिक आवेदन पत्र प्राप्त होने पर

कभी कभी कम्पनी के पास निर्गमित किये गए अंशों से अधिक आवेदन प्राप्त हो जाते हैं तो कम्पनी के संचालकों द्वारा निम्न में से दो विधियाँ अपनाई जाती है

1 – आवश्यकता से अधिक आये आवेदन को वापस करना :- इस विधि में कम्पनी प्राप्त आवेदनों में से जितने अंश निर्गमन करने का प्रविवरण दिया हैं उतने आवेदनों को अंश निर्गमित करके अतिरिक्त आवेदनों को वापस कर देती है I

जर्नल लेखा

Share application  a/c                                         Dr.

          To Share capital a/c      

    To bank a/c

अंशों का प्रीमियम पर निर्गमन

share issued at Primium

अंशों का प्रीमियम  पर निर्गमन (share issued at Primium)

कोई भी कम्पनी अपने अंशपत्रों का निर्गमन अपने अंकित मूल्य से अधिक पर कर सकती है जैसे किसी कम्पनी कके अंश का अंकित मूल्य  10 रू. है और वह उसे 12 रू. में विक्रय करती है तो यह २ रू. अधिक मूल्य ही अधिमूल्य या प्रीमियम कहलायेगा यह कम्पनी के लिए पूंजीगत लाभ माना जाता है

प्रीमियम का लेखा Alloutment  के साथ किया जाता है कभी –कभी प्रीमियम का लेखा अलग – अलग याचना पर भी किया

 

जर्नल लेखा

 

Share alloutment a/c                                         Dr.

अंशो का बट्टे पर निर्गमन

अंशो का बट्टे पर निर्गमन

अंशो का बट्टे पर निर्गमन

कंपनी अधिनियम की धरा 79 के अनुसार कोई कम्पनी अपने अंश पत्रों का निर्गमन अपने अंशों के अंकित मूल्य से अधिक पर कर सकती है अर्थात कोई अंश धारक अंकित मूल्य से कम धनराशि देकर अंशों के पूरे मूल्य का स्वामी हो जाता है  यह केवल व्ही कम्पनी ही कर सकती है जिन्होंने अपनी सेवाए एक वर्ष दे दी हो या अपने व्यवसाय का एक वर्ष पूर्ण कर चुकी हो

अंशो के प्रकार ( Types of shares )

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अंशो के प्रकार ( Types of shares )- अंश दो प्रकार के होते है

1. अधिमान  या पूर्वाधिकार अंश (Prefrenece Shares)

2. साधारण या समता अंश    (Equity Shares )

1. अधिमान  या पूर्वाधिकार अंश (Prefrenece Shares):-

  पूर्वाधिकारी अंशों से आशय उन अंशों से होता है जो निम्न शर्तों की पूर्ति करता हो

a) उन अंशों पर लाभांश की दर निश्चित हो

b)  कम्पनी के विघटन के समय उस राशी का भुगतान पहले किया जाता है

2. साधारण या समता अंश    (Equity Shares )  :

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