बालक

बालक आदमी के नर बच्चे को कहते हैं जैसे कि मादा बच्चे को बालिका कहते हैं। बड़ा होकर यही नर बालक, वयस्क नर या आदमी कहलाता है।

बालक शब्द का प्रयोग इंसानी बच्चे के लिंग को पहचान करने के रूप में किया जाता है जिससे कि उसके नर या मादा होने का पता चलता हैं। इस शब्द का प्रयोग सबसे पहले सन ११५४ में दिखाई देता है जो के इतिहास में है, पर यह पक्का नहीं किया जा सकता।

बालक जहा नर बच्चे का हिंदी शब्द हैं वहीं सभी भाषाओं में इसके लिए उपुक्त शब्द है, जैसे कि इंग्लिश में बॉय।

बालक के जीवन को सफल बनाने एवं समाज के वास्तविक शिल्पकार होते हैं शिक्षक

बालक के जीवन को सफल बनाने एवं समाज के वास्तविक शिल्पकार होते हैं शिक्षक

महर्षि अरविंद ने शिक्षकों के सम्बन्ध में कहा है कि ''शिक्षक राष्ट्र की संस्कृति के चतुर माली होते हैं। वे संस्कारों की जड़ों में खाद देते हैं और अपने श्रम से सींचकर उन्हें शक्ति में निर्मित करते हैं।' 'महर्षि अरविंद का मानना था कि किसी राष्ट्र के वास्तविक निर्माता उस देश के शिक्षक होते हैं। इस प्रकार एक विकसित, समृद्ध और खुशहाल देश व विश्व के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका ही सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होती है। आज कोई भी बालक 2-3 वर्ष की अवस्था में विद्यालय में शिक्षा ग्रहण करने के लिए आता है। इस बचपन की अवस्था में बालक का मन-मस्तिष्क एक कोरे कागज के समान होता है। इस कोरे कागज रूपी मन-मस्तिष्क म