शिक्षक

आधुनिक युग में शिक्षक की भूमिका महत्वपूर्ण है। शिक्षक वह पथ प्रदर्शक होता है जो हमें किताबी ज्ञान ही नहीं बल्कि जीवन जीने की कला सिखाता है। भारतीय संस्कृति में शिक्षक को दो स्वरूपों में देखा जाता है।कहते हैं यदि जीवन में शिक्षक नहीं हो तो 'शिक्षण' संभव नहीं है। शिक्षण का शाब्दिक अर्थ 'शिक्षा देने' से है लेकिन इसकी आधारशिला शिक्षक रखता है। शिक्षक का दर्जा समाज में हमेशा से ही पूज्यनीय रहा है

बालक के जीवन को सफल बनाने एवं समाज के वास्तविक शिल्पकार होते हैं शिक्षक

बालक के जीवन को सफल बनाने एवं समाज के वास्तविक शिल्पकार होते हैं शिक्षक

महर्षि अरविंद ने शिक्षकों के सम्बन्ध में कहा है कि ''शिक्षक राष्ट्र की संस्कृति के चतुर माली होते हैं। वे संस्कारों की जड़ों में खाद देते हैं और अपने श्रम से सींचकर उन्हें शक्ति में निर्मित करते हैं।' 'महर्षि अरविंद का मानना था कि किसी राष्ट्र के वास्तविक निर्माता उस देश के शिक्षक होते हैं। इस प्रकार एक विकसित, समृद्ध और खुशहाल देश व विश्व के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका ही सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होती है। आज कोई भी बालक 2-3 वर्ष की अवस्था में विद्यालय में शिक्षा ग्रहण करने के लिए आता है। इस बचपन की अवस्था में बालक का मन-मस्तिष्क एक कोरे कागज के समान होता है। इस कोरे कागज रूपी मन-मस्तिष्क म